नेशनल डेस्क
इटावा
इटावा सैफई के प्रतिष्ठिबत परिवार की बहू डिंपल यादव के जरिये देश की संसद (लोकसभा) के अंदर आगामी कुछ दिनों में एक ऐसा नया और अनूठा कीर्तिमान बनने जा रहा है, जिसकी न कभी कल्पना की गई थी, लेकिन सच यह है कि देश की राजनीति के केन्द्र बिन्दु माने जाने वाले, और आबादी में दुनिया के सातवें उपराष्ट्र कहे जाने वाले, उत्तर प्रदेश के अब तक के सबसे युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी अखिलेश यादव के कन्नौज लोकसभा क्षेत्र के उप चुनाव से 09 जून को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किये जाने के बाद, जिस दिन डिंपल यादव लोक सभा के अंदर सांसद पद की शपथ लेंगी, सम्भवता उस दिन एक नया और अनूठा इतिहास बनने का इंतजार कर रहा है, जो यह है कि लोकसभा के अंदर, जब एक साथ ससुर (मुलायम सिह यादव) और पुत्र वधु (डिंपल यादव) संसद की कार्यवाही में भाग लेते नजर आएंगे।
मालूम हो कि इसी सदन में उनके चचेरे देवर धर्मेन्द्र् यादव (सांसद बदायुं) भी नजर आएंगे। संयोग की बात है कि डिंपल यादव ने पति अखिलेश यादव की ओर से छोड़ी गई लोकसभा सीट से ही संसद भवन पहुंचने जा रही हैं। पूर्व में अखिलेश यादव ने जब 2009 में दो सीटों कन्नौज और फिरोजाबाद से जीतने के बाद फिरोजाबाद से इस्तीफा देकर डिंपल यादव को उप चुनाव लड़वाया था, लेकिन जिसमें कांग्रेस की ओर से की गई जबरदस्त घेराबंदी के चलते संसद तक पहुंचने का रास्ता लम्बा हो गया था। उसी कांग्रेस ने इस बार कन्नौज लोकसभा सीट के उपचुनाव में अपना प्रत्याशी न उतारने का ऐलान इस समाजवादी परिवार की बहू के लिए क्या किया की सपा की धुर विरोधी कही जाने वाली पार्टी बसपा को भी अपने कदम पीछे खींचने पड़ गए। इधर इस उप चुनाव में भाग न लेने वाले यह दोनों दल तो साफ तौर पर बच गये, लेकिन जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में लड़ने और अपने प्रत्याशी का नामांकन कराने की योजना बनाई, और जिस तरह से वह असफल सिद्ध हुई। उससे भाजपा की यूपी में एक बार फिर से किरकिरी हुए बगैर नहीं रह सकी। यह किरकिरी भी उस किरकिरी से किसी तरह से कम नहीं थी, जैसी यूपी विधानसभा चुनाव के समय बसपा से निष्काषित और मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे, बाबूलाल कुशवाहा को शामिल करके हुई थी।
डिंपल यादव उस लोकसभा क्षेत्र (कन्नौज) से सांसद निर्वाचित हुईं, जहां से वर्ष 1999 में उनके ससुर मुलायम सिंह यादव और 2000 में हुये उपचुनाव में उनके पति अखिलेश यादव विजयी हुये थे। अखिलेश बाद में 2004 और 2009 में भी विजयी रहे थे। अब बात कर लें डिंपल यादव के निर्विरोध निर्वाचित होने की, तो वह देश की ऐसी चौथी, कुल 44वीं और उपचुनाव में 9वीं ऐसी महिला हैं, जिन्हें लोकसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है। डिंपल यादव से पूर्व आखिरी बार उपचुनाव में भी महिला उम्मीदवार के रुप में दिल कुमारी भंडारी सिक्किम से निर्विरोध निर्वाचित घोषित की गईं थीं। बात उत्तर प्रदेश की करें तो 60 वर्ष 1952 में इलाहाबाद पूर्व से पी.डी.टण्डन निर्विरोध निर्वाचित घोषित किये गये थे। हांलाकि इनके बाद 1962 में उत्तर् प्रदेश से ही मानवेन्द्र शाह भी टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट (अब उत्तराखंड) से निर्विरोध निर्वाचित जरुर घोषित किये गए थे, लेकिन यह डबल सीट थी, यानी इस सीट से एक साथ दो सांसद जीते थे।

डिंपल की जीत से भारतीय संसद में बनेगा नया कीर्तिमान





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