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शानदार उद्घाटन के बाद भव्य अंदाज में होगा 19वें कॉमनवेल्थ खेलों का समापन

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नई दिल्ली.NNI.14अक्टूबर। कॉमनवेल्थ गेम्स के शानदार उद्घाटन समारोह के बाद अब समापन समारोह की घड़ी आते ही इसकी झलक पाने के लिए न केवल दिल्ली वालों को बल्कि पूरी दुनिया को बेसब्री से इंतजार है। मगर इस बार देश की सांस्कृकि धरोहर के बजाए 'वसुधैव कुटुम्बकम' पर आधारित कार्यक्रमों को पेश किया जाएगा और चार वर्ष बाद स्कॉटलैंड में होने वाले इन खेलों का न्योता भी दिया जाएगा। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित देश विदेश के कई गणमान्य अतिथि शामिल होंगे।

समारोह का खास आकर्षण इन खेलों के उप संरक्षक प्रिंस एडवर्ड होंगे, जो इन खेलों के समापन की घोषणा के साथ ही 2012 में स्कॉटलैंड की मेजबानी को हरी झंडी देना का एलान भी करेंगे। उद्घाटन समारोह की जबरदस्त प्रस्तुति के बाद इन कार्यक्रमों के क्रिएटिव निदेशक भरत बाला ने 'राष्ट्रीय सहारा' को बताया कि अब उनकी चुनौती और बढ़ गई है क्योंकि तीन अक्टूबर को हुए कार्यक्रम के बारे में उन्हें भी यह अंदाजा नहीं था कि कॉमनवेल्थ देश के साथ-साथ पूरी दुनिया में इसकी इतनी तारीफ की जाएगी। इसलिए अब मेरे लिए यह एक नई चुनौती है कि हम समापन की प्रस्तुति भी इस तरह से पेश करूं कि लोग पहले से और ज्यादा रोमांचित हो उठे।

उन्होंने बताया कि वैसे तो समापन समारोह के कार्यक्रमों की थीम में कोई बदलाव नहीं किया गया है मगर जिस तरह से शुभारंभ समारोह में हमने भारत की सांस्कृतिक समृद्धता से पूरे विश्व को अवगत कराया था उसी तरह समापन के मौके पर भारतीय कलाकर यह संदेश देंगे कि दुनिया के नक्शे में भले ही तमाम देश अलग-अलग हो मगर भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जिसकी नजरों में पूरा विश्व एक परिवार है।इसी में यह भी दिखाने की कोशिश होगी कि भारतीय प्रवास के दौरान 71 देशों के खिलाड़ियों, अधिकारियों व मेहमानों को भारत ने मात्र अतिथि समझ कर औपचारिकता भर नहीं निभाई है, बल्कि इन सभी देशों से आए लोगों को भारतीयों ने अपने परिवार का सदस्य समझ कर उनकी खातिरदारी और देखभाल भी की है। इस तरह जब यहां से लोग अपने-अपने देश जाए तो वहां पर भी वे भारतीय सभ्यता का मूल मंत्र 'वसुधैव कुटुम्बकम' से प्रेरणा ले सके।

 

समापन समारोह का मुख्य आकर्षण होगा विजयी खिलाडि़यों को डेविड डिक्सन पुरस्कार से सम्मानित करना। यह सम्मान प्रिंस एडवर्ड के हाथों दिया जाएगा। इसी दौरान अपने संबोधन में वे इन खेलों के समापन की घोषणा और 2014 में ग्लास्गो (स्कॉटलैंड) में खेलों के फिर होने का एलान करेंगे। इसी दौरान बैगपाइपर की धुन पर कोई चार सौ कलाकार रंगारंग मंच पर मार्च-पास्ट करते हुए स्कॉटलैंड स्थित ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स का शंखनाद करेंगे और इस मंच के माध्यम से इन खेलों में पधारने का न्योता भी देंगे। दिल्ली के विभिन्न स्कूलों के 2010 छात्र-छात्राएं 'वंदेमातरम' और 'चक दे इंडिया' की धुन पर करीब एक घंटे का कार्यक्रम पेश करेंगे। तीन घंटे तक चलने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत पंजाब, मणिपुर, केरल, गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र के कलाकर मार्शल आर्ट पेश करेंगे।

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