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यूपी में भर्ती होंगे 3300 दारोगा, 132 बनेंगे डीएसपी

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प्रादेशिक डेस्क
वाराणसी

उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में पिछले काफी समय से रिक्त चल रहे 60 प्रतिशत पदों पर शीघ्र भर्ती होने की संभावना जतायी जा रही है। प्रमुख सचिव गृह आर एम श्रीवास्तव के अनुसार कभी यह माना जाता था कि समाज के लिए आवश्यक विभागों में सृजित पद रिक्त न रहें। जिसमें पुलिस विभाग सबसे प्रमुख है। प्रदेश सरकार इन रिक्तियों को भरने के लिए अब अभियान चलाने जा रही है। श्री श्रीवास्तव के अनुसार प्रदेश में शीघ्र ही 3300 दारोगाओं की भर्ती होने जा रही है।


रविवार को यूपी के पुलिस महानिदेशक ए.सी शर्मा, एडीजी जेल राकेश सिंह व एडीजी अभियोजन आर.एन सिंह के साथ वाराणसी मंडल की कानून व्यवस्था व नगर निगम चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करने आए प्रमुख सचिव श्री श्रीवास्तव व डीजीपी श्री शर्मा विभागीय बैठक के बाद मंडलायुक्त सभागार में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सिर्फ दरोगा के कैडर को ही लें तो प्रदेश में करीब 17 हजार दारोगा के पद स्वीकृत हैं। इन पदों पर मात्र 7800 दारोगा ही नियुक्त हैं। 3300 नए दारोगाओं की भर्ती अब होने जा रही है। यह कार्य इसी वित्तीय वर्ष में किया जाएगा। पदोन्नतियां न होने के चलते भी बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। 3300 दारोगाओं की पदोन्नति हो चुकी है पर मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। दस जुलाई को इसमें तारीख लगी है। इस वजह से उन्हें पदोन्नति नहीं दी जा सकती। विभाग 132 इन्स्पेक्टरों को डिप्टी एसपी पद पर पदोन्नति देने जा रहा है। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। यह कार्य भी आगामी मार्च तक पूरा हो जाने का अनुमान है। इसी क्रम में 68 पीपीएस को आईपीएस बनाने की कवायद चल रही है। इनके आईपीएस बनने के बाद इतने ही डिप्टी एसपी को एडिशनल एसपी, एसपी की डीआईजी आदि बनाया जाएगा। इसके बाद ईओडब्ल्यू, सतर्कता आदि में अधिकारियों की कमी नहीं रह जाएगी।

थानों में अब मिर्ची बम
पुलिस महानिदेशक ए.सी शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार पुलिस के आधुनिकीकरण व सुदृढ़ीकरण पर जोर दे रही है। इसके तहत अब सभी बड़े थानों को एक-एक जीप अतिरिक्त दी जाएगी। चौकियों को एक बाइक मिलेगी। थानों को फोरेंसिक जांच में मदद मिल सके इसके लिए किट दी जाएगी। घटनाओं की फोटोग्राफी व वीडियो रिकार्डिग के लिए सभी थानों को कैमरे दिए जाएंगे। पुलिसकर्मियों के हथियारों को भी आधुनिक बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके तहत इन्हें नॉन लेथल वेपन (असंहारक हथियार) दिए जा रहे हैं। इसमें मिर्ची बम आदि शामिल है।

खुलेंगे आठ नए साइबर थाने
प्रमुख सचिव गृह ने बताया कि साइबर क्राइम के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए प्रदेश में साइबर थानों की संख्या बढ़ाई जाएगी। अभी तक लखनऊ व आगरा में ही साइबर थाने हैं। इन थानों में संसाधन उपलब्ध कराने के लिए आठ लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। अब सभी आठ जोन में साइबर थाने खोले जाएंगे। बाद में यह थाने मंडल स्तर पर खोले जाएंगे। डीजीपी के अनुसार साइबर थानों के लिए विशेषज्ञ पुलिस कर्मियों की जरूरत होती है। फिलहाल पुलिस में इसकी कमी है। इसको देखते हुए अब सभी दारोगा व डिप्टी एसपी के प्रशिक्षण में साइबर लॉ अनिवार्य रूप से पढ़ाया जा रहा है। इसमें हैकर्स से लेकर बैंक अधिकारियों तक को बुलाकर गड़बड़ी करने और उसे पकड़ने का तरीका सिखाया जा रहा है।

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