सतीश मलिक
संवाददाता, मुजफ्फरनगर
मुज़फ्फ़रनगर के थाना ककरोली पर है सांपो का श्राप, इस थाने पर सांपों का आतंक पुलिस कर्मियों के लिए किसी थर्ड डिग्री टॉर्चर से कम नहीं है। यूपी में यह पहला ऐसा थाना है जिसमे पुलिस कर्मी कम और सांप ज्यादा पाए जाते हैं, कब कहां कोई सांप निकल जाए ये खुद थाने मे तैनात पुलिस वाले भी नहीं जानते। कभी सांप हवालात में निकलते है तो कभी कमरे और कार्यालयों से, इन सांपों से थाने के पुलिस कर्मी खौफजदा हैं और रात के समय सतर्कता बरतते हैं। बाकायदा पुलिस कर्मी टार्च लेकर चलते हैं थाने को बने कई साल हो चुके हैं मगर अभी भी थाने में सांपों का निकलना बदस्तूर जारी है। इन सांपों को पकड़ने के लिए पुलिस ने विशेष रूप से एक व्यक्ति को थाने में रखा हुआ है। जो आज तक इस थाने से सैकड़ो सांप पकड़ चुका है।
दरअसल इन सांपो के निकलने के पीछे एक मुख्य वजह बताई जाती है की जब ये थाना बनाया गया था तो यहाँ सांपो की बमी (बसेरा) था। जिसको तोड़कर इस जगह थाने का निर्माण किया गया था शायद हो सकता है कि ये उसी का अभिशाप है की आज तक थाने में सांपो के निकलने का सिलसिला जारी है। इससे निजात पाने के लिए थाने में शिव मंदिर भी बनाया गया मगर कोई फ़ायदा नहीं हुआ। इस थाने के बारे में जब हमने सुना तो हम भी सन्न रह गए और हमारी टीम थाने में सांपों की दास्तां को जानने थाना ककारोली पहुंची। कई घंटो तक थाने के पुलिस कर्मियों से पूरी कहानी जाननी चाही तो जानकारी हुई की इस थाने पर सांपो का श्राप है और इसी वजह से सांप इस थाने को नहीं छोड़ते और आए दिन सांप थाने में कही ना कहीं से निकलते रहते हैं। हमने जब पुलिस कर्मियों की बातों को सुना तो हमे भी यकीन नहीं हुआ और हमारी टीम कई घंटो तक थाने में घूमती रही कि शायद कोई सांप निकल जाए तभी अचानक एक सांप पर हमारे कैमरे की नजर पड़ गई। जो थाने के परिसर में घास फूस वाली जगह से निकल कर वही पड़ी इंटो में जा घुसा। सांप को पकड़ने के लिए सपेरे को बुलाया गया जैसा की अक्सर सांप दिखाई पड़ने पर किया जाता है। जब सपेरा थाने पर पहुंचा तो उन्होंने सांप को पकड़ने के लिए अपने हुनर का इस्तेमाल करना शुरू किया हमारा कैमरा ये सब नजारा कैमरों में कैद कर रहा था। सपेरे ने आखिर खुछ घंटो की मेहनत के बाद सांप को पकड़ ही लिया। थाने में सांपों को पकड़ने के लिए गांव के रहने वाले सतीश नाम के एक युवक को बुलाया जाता हैं जिसका नंबर हमेशा थाने के सभी पुलिस कर्मियों पर है। क्योकि ये कोई नहीं जानता की सांप कब और कहा निकल जाए। सांप के निकलने पर तुरंत सतीश को बुला लिया जाता है उसका कहना हैं की आज तक वो इस थाने से सैकड़ो सांप पकड़ चुका है। सतीश की गैर मौजूदगी में किसी अन्य सपेरे को भी थाने में बुलाया जाता हैं।
दरअसल थाने में सांप कमरों, कार्यालय और हवालात से कब निकल जाए ये किसी को नहीं पता होता। सांप जब किसी सिपाही या दरोगा जी को दिखाई देता है तो तुरंत सांप पकड़ने वालो को फ़ोन घुमा दिया जाता है और वे लोग तुरंत थाने में पहुंचकर सांप को पकड़ कर ले जाते हैं हालांकि सांपों के निकलने का सिलसिला थाने में कई सालों पुराना है मगर गनीमत ये हैं की आज तक किसी सांप ने किसी भी पुलिस कर्मी को नहीं डसा जिसकी वजह खुद पुलिस कर्मी नहीं जानते। बस जब भी कोई पुलिस कर्मी या एसओ इस थाने में आते है तो उनको सबसे पहले थाने में सांपों के निकलने की कहानी सुनाई जाती है ताकि वो हमेशा सतर्क रहें।




