जनता की सेवा को अपना परम कर्तव्य मानने वाले औरैया जिले के जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर कहते हैं कि कितना भी बड़ा कार्य करने के बाद भी मन को वो सुकून नहीं मिलता है, जो जनता की सेवा करने के बाद प्राप्त होता है। जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर से खास बातचीत की हमारे संवाददाता आशीष तिवारी ने, प्रस्तुत है उसके कुछ अंश....
इंटरव्यू
जनता की सेवा कर मन को शांति मिलती है – डीएम ऋषिकेश भास्कर
सिर्फ बोलने की बजाय अब करके दिखाना होगा- गोरख प्रसाद जायसवाल
जनता की सेवा करने के उद्देश्य राजनीति में आये देवरिया के सांसद गोरख प्रसाद जायसवाल ने क्षेत्र के विकास के लिए अपनी सारी उर्जा लगा दी है । देश की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था से दुखी श्री जायसवाल यह मानते हैं कि लोकतंत्र में समस्याओं का हल भी लोकतांत्रिक तरीकों से ही निकाला जाना चाहिए । उनसे बात की हमारे संवाददाता अनिल पांडे ने प्रस्तुत है उसके कुछ अंश..........
प्रदेश को दीमक की तरह खोखला कर रही है माया सरकार – घनश्याम अनुरागी
बचपन से ही बहुत कुछ करने की चाह रखने वाले घनश्याम अनुरागी ने राजनीति को करिअर के रूप में सिर्फ इसलिए चुना कि वह पूरे सेवा-भाव व निस्वार्थ तरीके से जनता की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करना चाहते थे। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से सांसद घनश्याम अनुरागी से खास बातचीत की हमारे संवाददाता अनिल पांडे ने। अपने शुरूआती करिअर से लेकर प्रदेश की मौजूदा राजनीति पर घनश्याम अनुरागी ने क्या कुछ कहा प्रस्तुत हैं, उसके कुछ महत्वपूर्ण अंश…
प्र- आपका राजनीति की तरफ रुझान कब और कैसे हुआ ?
घनश्याम अनुरागी - देखिये शुरू से ही मेरे अन्दर लोगों के लिए कुछ करने की भावना थी और एक ऐसे मंच की तलाश थी। जिस पर खड़े होकर मैं अपने देश के और प्रदेश के लोंगो के लिए कुछ कर सकूं और आज मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है की मैंने अपना समय उन लोगों की सेवा के लिए दे पाता हूं। मेरा तात्पर्य सिर्फ लोगों की सेवा करना भर ही है।
प्र- उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को आप क्या कहेंगे? आप और आपकी पार्टी उत्तर प्रदेश के कानून तंत्र को किस नज़र से देखती है?
घनश्याम अनुरागी – उत्तर प्रदेश में कानून तंत्र की धज्जियाँ उड़ रही हैं। यहां पूरा जंगल राज है। सूबे की मुखिया के सिपाही ही यहां के लोंगो के लिए खतरा बन गए हैं। यहां के बहु-बेटियों की इज्ज़त लूटी जा रही है और फिर उन्हें झूठे केस में फंसा कर हवालात में डाल प्रताड़ित भी किया जा रहा है। ऐसे में यहां सुशासन की बात कहना गलत होगा। जब प्रदेश सरकार ने अपने मंत्री और विधायकों को महिलाओं की अस्मत लूटने की खुली छूट दे रखी है और खुद कानों में रुई डाल बैठी हुयी हैं, फिर ऐसे में प्रदेश के लोग कहां जाएं। किससे अपनी गुहार लगाएं? पूरे उत्तर प्रदेश में कानून तंत्र का मखौल उड़ाया जा रहा है। लॉ एंड आर्डर नाम की कोई भी चीज़ यहां दिखाई नहीं दे रही है, फिर ऐसे में इस प्रदेश सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए।
प्र- राजा भैया पर जो लूट का इल्ज़ाम लगाया गया है उस पर आप क्या कहेंगे ?
घनश्याम अनुरागी – आप ही सोचिए राजा भैया जैसा आदमी क्या 25 हज़ार जैसी छोटी लूट कर सकता है बल्कि जो हमेशा अपने लोंगो के लिए तत्पर रहा हो उसके साथ लूट नाम के शब्द को जोड़ना ही गलत है। ये सिर्फ प्रदेश सरकार की एक सोची-समझी चाल है। जिससे राजा भैया सरीखे लोंगो की साख गिराई जा सके और उन्हें बदनाम किया जाये। लेकिन ऐसा नहीं होगा क्योंकि यहां के लोगों को सच्चाई पता है। सरकार अपने नापाक मंसूबों में कभी भी कामयाब नहीं होगी। उसके सपा को बदनाम करने की साजिश का फल जनता देगी अगले विधानसभा चुनावों में।
प्र- उत्तर प्रदेश में हर रोज़ यौन उत्पीड़न के नए मामले सामने आ रहे हैं जबकि इन मामलों में प्रदेश सरकार से ही जुड़े लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, ऐसे में आप क्या कहेंगे? क्या सरकार को इसकी नैतिक ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए और दोषियों पर एक फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर सख्त से सख्त सजा देनी चाहिए, आप की पार्टी का इसमें क्या रुख है?
घनश्याम अनुरागी – बिल्कुल ये बात सौ आने सच है की प्रदेश में जो भी मामले आ रहे हैं, उसमें प्रदेश सरकार के ही मंत्री और विधायक का नाम सामने आ रहा है और ये बहुत ही शर्मनाक बात है और एक गंभीर समस्या भी। आपको इसमे एक खास चीज़ ये भी देखनी होगा की दलितों की मसीहा कही जाने वाली मायावती के गुर्गे ही ये काम कर रहे हैं और ज्यादातर यौन उत्पीड़न के मामले दलित वर्ग की महिलाओं के साथ ही हो रहे हैं। प्रदेश में लोग बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं, कहीं किसी इंजीनियर की विधायक द्वारा हत्या कर दी जा रही है तो कहीं किसी दलित के साथ सामूहिक बलात्कार। ये प्रदेश का दुर्भाग्य ही है जो इस तरह का दिन देखना पड़ रहा है। हमारी पार्टी इसके खिलाफ जन मोर्चा भी निकलेगी और प्रदेश में इसके खिलाफ क्रांति भी लाएगी। रही बात फास्ट ट्रैक कोर्ट की तो ये बहुत ही विशेष मुद्दा है। राज्य में इस तरह के घृणित अपराधों के लगातार एक के बाद एक उजागर होने से फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन बहुत ही ज़रूरी है लेकिन ये करेगा कौन? जबकि इसमें कोई और नहीं वो लोग शामिल हैं जो राज्य सरकार को चला रहे हैं। ये बिल्कुल वही बात है, जैसे किसी बिल्ली को ढूध की रखवाली पे लगा दो और सजा दो।
प्र- बांदा रेप केस को हुए तीन माह का समय बीत चुका है, ऐसे में राहुल गांधी का बांदा और प्रदेश के अन्य जिलों के दौरे को आप किस नज़र से देखते हैं?
घनश्याम अनुरागी - देखिए राहुल गांधी बबुआ राजनीति चमकाने का ही ढोंग कर रहे हैं। ये तीन महीने से कहां थे? राहुल जी ने पिछले आम चुनावों में बुंदेलखंड का दौरा भी किया था और गरीब कलावती के घर में रात भी बितायी थी तो कांग्रेस ने उन्हें भगवान राम का दर्ज़ा तक दे दिया था और कहा था की सबरी के कुटिया में राम पधारे हैं। अब बुंदेलखंड की प्यास ज़रूर बुझ जाएगी लेकिन क्या हुआ? इसमें बुंदेलखंड की प्यास तो नहीं बुझी पर कांग्रेस की सत्ता की प्यास जरुर बुझ गयी। क्या फिर कभी भी राहुल ने बुंदेलखंड का रुख किया? क्या उस कलावती के घर में झांकने दोबारा गए? ये सिर्फ एक कलावती की बात नहीं है बल्कि प्रदेश की हजारों कलावती की बात है। यह नाटक करने से कुछ नहीं होगा अगर कुछ करना है तो जमीनी सतह पर रहकर कुछ करना होगा न की वहां की जानता के बीच में जाकर, यह कह देने मात्र से की “व्हाट इस हैपनिंग इन दिस स्टेट” अरे ये आपको भी पता है की क्या हो रहा है, और क्या नहीं। फिर आखिर ये नाटक क्यों? उस गरीब और पीड़ित लोगों की आंखों से दुःख और पीड़ा के आंसू तभी जाएंगे, जब आप कुछ करेंगे। ये चुनावी वादे करना आप छोड़ दें। प्रदेश के लिए अगर किसी ने कुछ किया तो सपा ने चाहे वो कन्या धन की बात हो या फिर टीचरों की बहाली बहुत सारे ऐसे सकारात्मक कदम सपा ने अपने शासनकाल में उठाये जिससे हमेशा ही प्रदेश वालों का भला हुआ।
प्र- राहुल गाँधी के इस तरह के दौरे से युवाओं पर किस तरह का प्रभाव पड़ता है और चुनावी परिपेक्ष में आप इसे क्या कहेंगे?
घनश्याम अनुरागी - राहुल गाँधी के इस दौरे से किसी का कुछ भी भला नहीं होता है बल्कि युवाओं में इससे निराशा ही पैदा होती है। खुद परिवारवाद की राजनीति करने वाले अगर ये कहें की हम नए युवा चेहरों को राजनीती में आने का निमंत्रण देते हैं तो पहले ये बताएं की कौन से नए युवा चेहरे, जो किसी बड़े कांग्रेसी परिवार से न हो वो आए हैं, ये सारी कोरी बाते हैं, लोग बेरोजगारी से ग्रसित हैं। महंगाई, भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। फिर इस तरह के दौरे का क्या मतलब एक तरफ तो कहते हैं कि हमें साफ़ और अच्छी राजनीति चाहिए और दूसरी तरफ उन्हीं के पार्टी के नेता तमाम बड़े घोटालों में फंसे दिखाई दे रहे हैं, वो भी घोटाले छोटे-मोटे नहीं बल्कि इतने भारी भरकम की इसे देख देश वालों की सांस ही अटक के रह गयी है। उनके लिए कांग्रेस के युवराज क्या कर रहे हैं। ये घूम-घूम कर दौरा करना क्या है, अगर उनको वाकई में घूमना है तो सबसे पहले वो अपने पार्टी में ही घूम लें। वहां ही व्याप्त भ्रष्टाचार को देख लें और उनकी जड़ों को साफ़ करें। देश का भला खुद ब खुद हो जायेगा। उनको इतना तकल्लुफ भी नहीं करना होगा। इस तरह के बेफिजूल दौरे कर वो सिर्फ सरकारी धन ही बर्बाद कर रहे हैं और लोंगो में निराशा का भाव पैदा कर रहे हैं। कोई भी इससे खुश नहीं है, ये बिल्कुल वही बात है “काठ की हांडी आग पर एक ही बार चढ़ती है” अब इन दौरों का कुछ नहीं होने वाला तमाम घोटालो में घिरी सरकार अपने ही मंत्रियो को पहले देखे। फिर दूसरे प्रदेशों में आए, अब ये राहुल ट्रेंड नहीं चलने वाला है, माननीय मुलायम सिंह जी ने प्रदेश के लोंगो को इस भ्रष्ट सरकार से निजात दिलाने और राज्य में सुशासन लेन के लिए प्रण किया है और वो इसके प्रति कटिबद्ध भी हैं। हम सभी पार्टी के कार्यकर्त्ता उनका तन-मन से सहयोग भी कर रहे हैं ताकि प्रदेश के बिगड़ते हालात पर काबू पाया जा सके और लोगों को इस भ्रष्ट सरकार से निजात दिलाया जाए।
प्र- उत्तर प्रदेश राज्य सरकार और केंद्र सरकार में आप क्या समानता देखते हैं? इस पर आप क्या कहेंगे?
घनश्याम अनुरागी – एक तरफ अपराध का बोल बाला है तो दूसरी तरफ भ्रष्टाचार का। इसमे मैं भला क्या बोलूं। किसको बड़ा कहें और किसको छोटा यह कहना ही अपराध होगा। जहां एक तरफ प्रदेश में छोटी बहन अपराध और अपराधियों को शह दे रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़ी बहन केंद्र में भ्रष्टाचारियों की जड़ को सींच के उनको बढ़ा रही हैं। अब ऐसे में देश का क्या होगा इसका भगवान ही मालिक है?
प्र- प्रदेश में अगर मायावती के द्वारा किये जाने वाले कार्यों की बात कहें तो आप अपने स्मरण से क्या कुछ कहेंगे?
घनश्याम अनुरागी - देखिये हमारे सूबे के मुखिया के पास करने के लिए बहुत सारे काम हैं लेकिन उनका काम सिर्फ प्रदेश में हाथियों की संख्या बढ़ाना है और उनकी निगरानी करना ताकि कोई हाथी भाग न जाए गरीबों का पैसा चूस कर वो अपने हाथियों की संख्या बढ़ा रही हैं। अगर प्रदेश में कोई भी ज़मीन खाली है तो उस पर स्कूल, अस्पताल की जगह बहन जी के पार्क ही बनाने चाहिए और उसमे पत्थर कटाई ही होनी चाहिए ताकि उनको हाथियों की शक्ल दी जा सके। मायावती जी को प्रदेश के लोगों से मिलने का समय ही कहां है, वो तो सिर्फ अपने पार्को के दौरों में ही व्यस्त हैं, आखिर उनको हाथियों की संख्या में इजाफा जो करना है। अब ऐसे में प्रदेश राम भरोसे ही है।
प्र- आगामी विधानसभा चुनाव में आपकी पार्टी की क्या रणनीति रहेगी ?
घनश्याम अनुरागी - बात बिल्कुल साफ है, अब जनता ने भी सरकार के रूप-रंग को देख लिया है। जनता, सपा को ही अपना अगला मताधिकार देने वाली है, अगर प्रदेश के लोगों के लिए किसी ने कुछ किया है, तो वो सिर्फ और सिर्फ सपा है। ये हम नहीं बल्कि लोग भी कहते हैं। रणनीति भी यही है की हम इस भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे और जनांदोलन करेंगे और ये काम हम कर भी रहे हैं।
प्र- इस बार चुनाव में सपा के साथ अमर सिंह जी नहीं है इससे सपा पर कितना असर पड़ेगा ?
घनश्याम अनुरागी - बिल्कुल भी असर नहीं पड़ेगा वो कल की बात है। हमें आज को देखना है। अमर सिंह जी तब तक जाने जाते थे, जब तक वो सपा में थे न की उनके नाम से लोग सपा को जानते थे। फिर ऐसे में हम उनको यही सलाह देंगे की वो अपने स्वास्थ्य लाभ को देखते हुए आराम करें न की इन झंझटों में फंसे रहे और उनके न रहने से पार्टी के ऊपर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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