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इटावा सदर एसडीएम एस.के.भाटिया से एक मुलाकात

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(मनोज दुबे) जनपद इटावा में 17 अगस्त 2011 को इटावा सदर उप जिलाधिकारी के रूप में चार्ज ग्रहण करने वाले और वर्ष 2008 बैच के पीसीएस अधि‍कारी शैलेंद्र कुमार भाटिया अपनी शुरूआती प्रशासनि‍क सेवा के ऐसे वि‍लक्षण प्रति‍भा के अधि‍कारी हैं, जो शुरू से ही दो से ज्यादा पदों का दायि‍त्व बखूबी नि‍भाते आ रहे हैं। इटावा में भी वह एसडीएम के पद के अलावा सि‍टी मजि‍स्ट्रेट के पद का कार्य भी बडी जि‍म्मेदारी और तत्परता से नि‍भा रहे हैं। हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में आप जि‍ला टॉपर भी रहे। इन्हीं खूबि‍यों वाले प्रशासनि‍क अधि‍कारी की एक खूबी यह भी है कि‍ आप एक अच्छे कवि‍ भी हैं और कई कवितायें आपकी प्रकाशि‍त भी हो चुकी हैं जि‍स कि‍ताब में आपकी कवि‍ता छपी उसके पदेन अध्यक्ष यूपी के गर्वनर हैं।‍ ऐसे अधि‍कारी से साक्षात्कार के लि‍ए समय मांगा तो वह अति‍व्यस्त‍ता के बावजूद बात करने को तैयार हो गए, और काम के बीच ही शुरू हो गया बातचीत का सि‍लसि‍ला। पेश है उनसे हुए सवाल-जबाब के कुछ अंश... प्रश्न – अपने बारे में कुछ बताएं?
उत्तर - मेरा नाम शैलेंद्र कुमार भाटिया है। मैं मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद नि‍वासी हूं। मेरे पिता का नाम श्री वंशीधर भाटिया है, जो एक इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य हैं।

प्रश्न - आपकी प्रारंभिक शिक्षा कहां से और कि‍स स्तर पर शुरू हुयी?

उत्तर - मेरी शुरुआती शिक्षा बस्ती जनपद के सरकारी प्राथमि‍क वि‍द्यालय से हुई। वर्ष 1990 में हुई हाईस्कूल की परीक्षा में बस्ती जनपद में प्रथम स्थान प्राप्त कि‍या था। 1992 में फैजाबाद जनपद के राजकीय इण्टर कालेज से 77 फीसदी अंको के साथ इण्टर मीडिएट की परीक्षा पास की। इलाहाबाद वि‍श्व वि‍द्यालय से बी.एस.सी. परीक्षा फि‍जि‍क्स और मैथ वि‍षय से 72 प्रति‍शत अंकों के साथ पास की, जि‍समें मैथ से टॉपर रहे। जे.पी. इंस्टीट्यूट इलाहाबाद से एम.एस.सी. परीक्षा मैथ ऑफ कैमि‍कल साइंस से 67 प्रति‍शत अंकों के साथ पास की। पोस्ट ग्रेजुएट समाज शास्त्र से 66 प्रति‍शत अंकों के साथ राम मनोहर लोहि‍या वि‍श्व्वि‍द्यालय फ़ैजाबाद से समाजशास्त्र वि‍षय टॉप के साथ कि‍या।

प्रश्न- प्रशासनि‍क सेवा में पहली नियुक्ति किस वर्ष और कि‍स जनपद में हुई?
उत्तर - पहली नियुक्ति वर्ष 2008 में रामपुर जनपद में उपजिलाधिकारी के पद पर हुई और इटावा आने तक तीन वर्ष तक इस पद पर रहा।

प्रश्न - रामपुर जनपद में आप उपजिलाधिकारी के अलावा और कि‍न-कि‍न पदों पर रहे?

उत्तर - रामपुर में तीन वर्षों की प्रशासनि‍क सेवा के दौरान उपजिलाधिकारी के साथ- साथ जिला सूचना अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी, सचिव रामपुर और जेल अधीक्षक जैसे पदों का भी दायि‍त्व भी रहा।

प्रश्न - बीते तीन वर्षों की सेवा के दौरान क्या कभी आप पर राजनैतिक दबाब भी पड़ा?
उत्तर - मेरे ऊपर अभी तक किसी प्रकार का कोई राजनैतिक दबाब नहीं पड़ा है। मैं सभी को साथ लेकर चलता हूँ। अपने पास आने वाले हर नेता को वह सत्ताधारी ही समझ कर उनका कार्य करते हैं, चाहे वह कि‍सी भी दल का हो। साथ ही आज का काम आज ही बल्कि हर आने वाले समस्याग्रस्त व्यक्ति का काम तुरंत करने का पक्षधर हूँ, और ऐसा करता आ रहा हूँ। शायद यही वजह रही कि‍ कोई भी उनका स्‍थानान्‍तरण नहीं चाहता था। सांसद जयाप्रदा रहीं हों या फि‍र काग्रेंस की बेगम नूरबानो, सपा नेता मो. आजम खां हों या फि‍र भाजपा के मुख्‍तार अब्‍बास नकवी या फि‍र बसपा के नेता सभी से अच्‍छे संबंध रहे।

प्रश्न - आपके अभी तक के सेवाकाल के दि‍नों के महत्वपूर्ण पल क्या रहे, और सबसे ज्यादा खुशी कब मि‍ली?
उत्तर - गणतंत्र दिवस(26 जनवरी) पर रामपुर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक द्वारा सराहनीय कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र, वर्ष 2011 में जेल अधीक्षक के पद पर रहते हुये कानून व्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान के लिये बरेली जोन के आई.जी. द्वारा प्रशस्ति पत्र, लोक अदालत में अच्छे योगदान के लिए सीनियर डिवीजन द्वारा प्रशस्ति पत्र, अच्छे कार्यों से खुश होकर जिलाधिकारी रामपुर ने आउट ऑफ टर्न प्रमोशन के लिए लिखना और बाढ़ से घिरे पूरे गांव को मदद पहुंचाने के लिए भारतीय किसान यूनियन द्वारा सराहना पत्र तीन वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां रहीं हैं, और सबसे ज्यादा खुशी के क्षण भी रहे।

प्रश्न - जनपद इटावा के बारे में बताये, जब से आप आये हैं क्या देखा है?
उत्तर - इटावा बहुत ही अच्छा है। यहाँ के कर्मचारी बहुत ही सभ्य है। हमारे वि‍भागीय कर्मचारी तो और भी ज्यादा अच्छे हैं। इटावा के बारे में जैसा लोग कहते हैं कि यहाँ राजनीति बहुत होती है, वैसा अभी तक ढाई माह के कार्यकाल में देखने सुनने को नहीं मि‍ला है। लोग भी काफी अच्छे हैं।

प्रश्न - फुर्सत के क्षणों में आपको क्या करना पसंद है?

उत्तर - प्रशासनिक कार्यों के बाद यदि समय मिल जाता है तो कविता लिखना पसंद करता हूँ। आतंकवाद, युद्ध और माँ जैसे विषयों की कई कविताये राजभाषा पत्रिका जो रामपुर की रजा़ लाइब्रेरी द्वारा प्रकाशित होती है, और इस लाइब्रेरी के अध्यक्ष राज्यपाल हैं, में छप चुकी है।

प्रश्‍न - आपसे पूर्व भी क्‍या कभी कोई आपके परि‍वार से प्रशासनि‍क सेवा में रहा?

उत्‍तर - कोई नहीं। में ही पहला व्‍यक्‍ति‍ हूं।

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