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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामे की बयार, स्पीकर पर फेंका पंखा

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एनएनआई डेस्क

श्रीनगर

एमएलसी बनाने का झांसा देकर पैसे एंठने वाले नेशनल कांफ्रेंस नेता मोहम्मद यूसुफ की पुलिस हिरासत में मौत को लेकर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। हंगामे के बीच ही एक पीडीपी सदस्य ने स्पीकर पर पंखा फेंक दिया। हालांकि वह बाल-बाल बच गए। हंगामे के मद्देनजर सदन कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई।

पीडीपी ने पूरे मामले में उमर अब्दुल्ला की भूमिका जांच की मांग करते हुए उनसे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा मांगा है। सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही मामले पर चर्चा कराने के लिए पीडीपी सदस्यों ने स्पीकर मोहम्मद अकबर लोन को काम रोको प्रस्ताव सौंपा। काम रोको प्रस्ताव पेश करने का निर्णय रविवार पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के निवास पर हुई आपात बैठक में लिया गया था। पीडीपी ने इस मुद्दे पर काम रोको प्रस्ताव दिया, तो स्पीकर ने प्रश्नकाल के बाद इस पर चर्चा करने की बात कही।

इसे लेकर स्पीकर और विपक्ष के विधायकों में तीखी नोक-झोंक हुई और मामला यहां तक पहुंच गया कि गुस्से में पीडीपी के एक विधायक ने पंखा उठाकर स्पीकर पर फेंक दिया, हालांकि वह इसमें बाल-बाल बच गए। पीडीपी प्रवक्ता का कहना था कि इस मौत के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय, राज्य के गृहमंत्री, मुख्यमंत्री का स्टाफ तथा क्राइम ब्रांच के कुछ अधिकारी शक के दायरे में हैं, इसलिए इसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

उनका कहना था कि जिम्मेदार विपक्ष होने के नाते पीडीपी इस मौत से जुडी हर बात को सामने लाने का प्रयास कर रही है। इस मौत में पैसे की खातिर सत्ता के दुरूपयोग की बात भी सामने आई है, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री, गृह राज्यमंत्री, केंद्रीय अक्षय ऊर्जा मंत्री फारूक अब्दुल्ला को अपने पदों से त्यागपत्र देना चाहती है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के त्यागपत्र की पीडीपी की मांग को खारिज करते हुए वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर ने मुख्यमंत्री का बचाव। राथर ने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस नेता की मौत पर पीडीपी राजनीति कर रही है।

मात्र आरोपों के आधार पर मुख्यमंत्री को त्यागपत्र देने के लिए नहीं कहा जा सकता। उधर, एमएलसी बनाने के आश्वासन पर नेशनल कांफ्रेंस नेता द्वारा कार्यकर्ताओं से पैसे लेने का मामला सामने आने के बाद सरकार में घटक दल कांग्रेस भी परेशान है। कांग्रेस नेता इसे राज्य में कांग्रेस की छवि खराब होने की नजर से देख रहे हैं।

हालांकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रो. सैफुदीन सोज ने कहा है कि संदिग्ध परिस्थितिोयों में पुलिस हिरासत में हुई नेकां नेता की मौत की जांच पूरी होने से पहले किसी नतीजे तक नहीं पहुंचना चाहिए। दूसरी ओर, नेशनल कांफ्रेंस ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि मौत की जांच के लिए एक मौजूदा जज की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है। यूसुफ पर पैसे लेकर एमएलसी बनाने के नाम पर पैसा लेने का आरोप था, जिसके बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने क्राइम ब्रांच को बुलाकर यूसुफ को उनके हवाले कर दिया था। बाद में यूसुफ की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी।

 

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