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सवाल बचपन को बचाने का..

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देश की राजधानी दिल्‍ली से सटे नोएडा में आठ साल की एक बच्‍ची को अगवा कर पांच महीने तक यातनाएं दी गईं। उसकी जीभ काट दी गई, दांत तोड़ दिए गए और सिगरेट से दागा गया। इस मामले ने फिर एक बार देश में बाल उत्पीड़न के खिलाफ कठोर कानून बनाने और बच्चों के अधिकार सुरक्षित करने की जरूरत परबहस छिड़ गई है।

 

 

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़े बताते हैं कि बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। वर्ष 2001 में जहाँ ऐसे मामलों की संख्या 2265 थी, वहीं वर्ष 2008 में यह बढ़कर 5749 हो गई। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने वर्ष 2007 में 13 राज्यों में बाल उत्पीड़न पर सर्वेक्षण कराया था, जिसमें 12447 बच्चों से बात की गई थी। इसमें पाया गया कि 53 फीसदी बच्चों के साथ किसी न किसी तरह का यौन उत्पीड़न हुआ। वहीं, उत्पीड़न करने वाले 50 फीसदी लोग बच्चों के परिचित ही थे या ऐसे व्यक्ति थे जिन पर बच्चों का भरोसा था या जिम्मेदारी थी। एशियाई देशों में बच्चों की उपेक्षा और कुपोषण की विस्तृत चर्चा के लिए अगले महीने एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।

 

भारतीय बाल उत्पीड़ण और उपेक्षा तथा बाल श्रम (निषेध) ग्रुप यानि आई कैनस्ल ग्रुप अर्थात Indian Child Abuse and Neglect and Child Labour Group (I-CANCL group) तथा बाल उत्पीड़न निरोधी अतर्राष्ट्रीय सोसाइटी यानि International Society for Prevention of Child Abuse and Neglect (ISPCAN) ने मिल कर एशिया प्रशांत क्षेत्रीय कांफ्रेंस आयोजित करने का फैसला किया है।


यह आयोजन 6 से 9 अक्टूबर तक होगा जिसमें देश विदेश के कई जाने माने विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। आई कैनस्ल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जाने-माने बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राजीव सेठ हैं जो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से संबद्ध हैं। डॉक्टर सेठ के मुताबिक इस कांफ्रेंस में पहली बार इतने बड़े स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ आ रहे हैं। APCCAN 2011 के नाम से आयोजित हो रहे इस कांफ्रेंस में युवाओं को भी भागीदार बनायाजाएगा। डॉक्टर सेठ के मुताबिक एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों में बाल उत्पीड़न की दर पूरी दुनिया के मुकाबले ज्यादा है और इस कांफ्रेंस में इन सभी देशों के विशेषज्ञों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता भी जुड़ेंगे।


हैरानी की बात यह है कि एशिया-प्रशांत के विकासशील देशों में, जहां बाल हितों को ज्यादा सुरक्षित होना चाहिए वहां इसका कानूनी पक्ष बहुत कमजोर है। आयोजकों के मुताबिक यह कांफ्रेंस एशियाई देशों में बाल हितों को सुरक्षित करने की दिशा में ठोस पहल भी करेगा तथा सभी देशों के प्रतिनिधियों के माध्यम से उनकी सरकारों तक भी संदेश पहुंचाया जाएगा। इस कांफ्रेंस में भारत सरकार का महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, युनिसेफ, NCPCR तथा कई नामी स्वयं सेवी संगठन जैसे PLAN, SOS Children village International, Save the Children, IACR, HAQ, CRY, World Vision तथा ICCW भी हिस्सा लेंगे।

 

सभार - धीरज

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